शनिवार, 28 सितंबर 2013

बचपन

वो दिन कितने अच्छे थे,
जब दिल हमारे सच्चे थे।
वो बचपन कितना सुहाना था,
जब हम छोटे बच्चे थे।

जब मिट्टी के घर बनाते थे,
हम दिनभर पतंग उड़ाते थे।
जब मम्मी से आंख बचाकर,
हम बाहर खेलने जाते थे।

जब हम ही चोर हम सिपाही,
हम ही राजा बनते थे।
जब गिल्ली डण्डा खेलने,
हम दो टीमों में बंटते थे।

जब लाल पीले हरे पंख,
हम कापी में दबाकर रखते थे।
जब सांप सीढी और चिड़िया उड़,
हम खेलते नहीं थकते थे।

जब अण्टी के घर की घण्टी,
हम बजा कर भाग जाते थे।
जब 26 जनवरी के लड्डू,
हम बड़े चाव से खाते थे।

जब पेड़ पर चढ कर के,
हम उतरने को चिल्लाते थे।
जब घरवालों से छुपकर,
हम गुलेल खूब चलाते थे।

जब कागज की नाव बनाकर,
हम पानी में तैराते थे।
जब बारिशों में अक्सर,
हम झूम झूम नहाते थे।

जब सुबह सुबह प्रार्थना को,
हम लाईन में लग जाते थे।
जब मैम के क्लास में आते ही,
हम गुड मार्निंग गाते थे।

जब होमवर्क अधूरा होता था,
हम झूठे बहाने बनाते थे।
जब मैडम छुट्टी रखती थी,
हम सब खुशी मनाते थे।

जब दोस्तों के संग मिल,
हम अमचूर इमली खाते थे।
जब एक रूपए की चार टाफी,
हम दूधमलाई वाली लाते थे।

जब नेशनल चिल्ड्रंस बैंक के,
हम नकली नोट गिनते थे।
जब दोस्तों के हाथ से,
हम कंचे, चुम्बक छीनते थे।

जब नई कापी लाते ही,
हम सुगंध उसकी लेते थे।
जब दोस्तों को बर्थ डे पर,
हम शायरी लिख कर देते थे।

जब दादी नानी से जिद कर,
हम कहानियां सुनते थे।
जब परियों, राजकुमारों के,
हम सपने अक्सर बुनते थे।

जब मेहमानों के आने पर,
हम कमरे में छुप जाते थे।
जब वापिस उनके जाते ही,
हम बची हुई मिठाई खाते थे।

बस वही तो दिन थे,
जब हम दिल की सुनते थे।
बस वही तो दिन थे,
जब हम सच्चाई को चुनते थे।

लेकिन ये जो समय है,
ये तो चलता जाएगा।
बचपन जवानी बुढापे में,
जीवन को बदलता जाएगा।

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

जय जय जय घरवाली

अभी कुछ दिनों पहले कुवारों के लिए एक गीत लिखा है। तो कुछ पत्नी पीड़ितों ने भी एक गीत लिखने की गुजारिश की। लीजिए हाजिर है हुजूर । और हाँ इसे ओम जय जगदीश हरे की धुन में गा कर देखिएगा हो सकता है जीवित आत्मा को शांति मिले।

जय जय जय घरवाली
हो देवी जय जय घरवाली
तुम्हरे सामने अभी तक
किसी की नहीं चाली।।

तुम सैण्डिल की देवी
तुम बेलन वाली
हो देवी आप बेलन वाली
तुम्हरा वार अभी तक
गया न कभी खाली।।
जय जय.........

कभी फेंकती झाडू हम पर
कभी फेंके थाली
हो देवी आप फेंकती थाली
कईयों ने इस भक्ति में
परमगति पाली।।
जय जय..............

जिस दिन तुम्हरे मन में आता
जी भर देती गाली
हो देवी जी भर देती गाली
तुम्हरी महिमा हर दम
गायें बजा ताली।।
जय जय..............

प्रेम से बोलिए घरवाली देवी की जय।।

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

पापा मेरी भी शादी करवा दो ना

एक छोटा सा गीत । अखण्ड और चिर कुंवारो के लिए उपयोगी।  मेरे लिए तो नहीं फिर भी किसी और के लिए लिखा है. देख के बताइयेगा कैसा लगा।

पापा मेरी भी शादी करवा दो ना
मेरे लिए कहीं से एक बीवी ला दो ना

मुझे बीवी चाहिए चाहे लम्बी हो या छोटी
चाहे गोरी हो या काली चाहे पतली हो या मोटी
मेरे लिए प्लीज पापाजी एक लुगाई ला दो ना
पापा मेरी भी शादी करवा दो ना

मैं नौकरी करूंगा वो घर का काम करेगी
आप देखना टीवी मम्मी आराम करेगी
सात फेरे एक बार मुझे भी दिला दो ना
पापा मेरी भी शादी करवा दो ना

शादी वाला वो लडृडू पापा हर किसी को भाए
जो खाए वो पछताए, ना खाए ज्यादा पछताए
शादी वाला वो लडृडू मुझे भी खिला दो ना
पापा मेरी भी शादी करवा दो ना

रविवार, 15 सितंबर 2013

जंगल की डेमोक्रेसी

जंगल का राजा शेर, 
हुआ वन से लापता।
कई दिनों तक खोजखबर ली, 
मिला न कोई अता पता।
मिला न कोई अता पता,
सूनी हुई सरकार।
जनता सारी लड़ने लगी,
कर आपस में तकरार।
कर आपस में तकरार,
घोषित बैठक आपात हुई।
चुनाव करा दो इस बार,
तय अंत में यह बात हुई।

वोट हुए जंगल में भी,
अब डेमोक्रेसी आ गई।
बंदर बना राजा जंगल का,


जनता खुशी मना रही।
जनता खुशी मना रही,
शांतिपूर्ण सब काम हुआ।
पर शेर के वापस आने से,
चैन सबका हराम हुआ।
चैन सबका हराम हुआ,
गायब मिला बकरी का बच्चा।
गुहार लगाई राजा जी से,
न्याय करो अब सच्चा सच्चा।

महाराजधिराज बंदर राजा ,
चले जनता के आगे आगे।
जहां बैठा था आतंकवादी,
पहुंचे वहां भागे भागे।
पहुंचे वहां भागे भागे,
खेल रहा शेर बच्चे से।
जनता बोली राजा जी से,
अब सबक सिखाओ अच्छे से।
सबक सिखाओ अच्छे से,
राजा कूदे डाल डाल पर।
कड़ी निंदा करते हुए,
परेशान जनता के हाल पर।

बकरी बोली महाराज,
जल्दी से कुछ एक्शन लो।
बच्चा मेरा मारा जाएगा,
आप जरा तो टेंशन लो।
आप जरा तो टेंशन लो,
राजा बोले डरे डरे।
जो खाएगा वो तो खाएगा,
हम तो इसमें क्या करे।
हम तो इसमें क्या करे,
मत हमें अब सताओ तुम।
हमारी मेहनत में कहीं कोई,
कमी हो तो बताओ तुम।


नोट चित्र अंतरजाल से लिया गया है जिसका उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन है किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं।

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

सौ और एक सौ आठ

फिर एक बकवास पोस्ट। आप लोग पढने के बाद  ऐसा सोच सकते है. पर आज मैं बहुत खुश हूँ. अब पूछिए क्यो ? क्या कहा ? नहीं पूछोगे। मत पूछो। मैं तो बिना पूछे ही बता दूंगा। अब देखिये  जनाब हुआ यूं कि आज मेरे इस छोटे से ब्लॉग पर अनुसरण कर्ताओ की संख्या पूरी एक सौ हो गयी है. एक छोटा सा ब्लॉग अगर इस तथाकथित मुकाम तक पहुँचता है तो खुश होने का कारण तो बनता ही है हूजूर। 
जब मैंने दसवी कक्षा का एग्जाम दिया तो गर्मी की छुट्टियों में निट्ठल्ला बैठा रहता था . तो नेट पर कुछ महानुभावो के ब्लॉग पढने को मिले तब मेरे दिल में ये ख्याल आया कि क्यों न मैं भी एक ब्लॉग लिखूं। बस इस तरह शुरुआत हुई थी इस बहुत कुछ की. पहले साल तो जोश जोश में जो भी मन में आया या जो भी देखने में अच्छा लगा उसे पोस्ट करता गया और पहले साल यानि 2011 में तो 94 पोस्ट कर डाली। फिर अगले साल ऐसा लगा के छोडो ना यार कौन पढता है मेरे ब्लॉग को. धीरे धीरे लिखना कम कर दिया और दुसरे साल यानी 2012 में सिर्फ 6  पोस्ट की।  लेकिन तभी अचानक एक दिन देखा कि ब्लॉग पर पेज व्यू बढ़ रहे है और अनुसरणकर्ता भी बढ़ कर 50 से ऊपर हो गए है।  तो फिर एक बार जोश आया और फिर पोस्ट करने शुरु किये.लेकिन रेगुलर पोस्ट नहीं कर पाया। फिर भी आज तक कुल पोस्ट 108 हो चुकी है, और पेज व्यू भी लगभग 26000  है सो खुश होने का कारण तो बनता है. सो मी हैप्पी हैप्पी टू डे..अभी मैं फर्स्ट इयर में आ गया हूँ, तो टाइम मिलने पर पोस्ट जरुर करता रहूँगा। 
अब रही बात मेटर की तो पहले साल तो बहुत कुछ पोस्ट किया। कभी तकनीक के बारे में तो कभी साहित्य के बारे मे. और अगली साल कुछ खुद ने छोटी छोटी सी बचकानी कवितायेँ लिखनी शुरू कर दी थी सो वो पोस्ट करनी शुरू कर दी थी और आज तक कर रहा हूँ. फिर भी लोग मुझे पढ़ रहे है बस यही बहुत है. अंत मैं सभी अनुसरण कर्ताओ को बहुत बहुत धन्यवाद. सभी टिप्पणीकारो को भी धन्यवाद और ब्लॉग पर पधारने वाले सभी आगंतुको का भी हार्दिक आभार.एक बार फिर खुद को ही 108 पोस्ट और 100 अनुसरण कर्ताओं तक पहुँच बनाने के लिए शाबाशी  जय भारत।

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

नागीणो नागौर

मेरे छोटे से शहर नागौर के बारे में कुछ बाते मेरे शहर की ही भाषा राजस्थानी में 

शहर अणूतां इण दुनियाँ मांही
पण जठै री बात ही कीं और है।
बो नागीणो नागौर है।।

सबसूं न्यारे इण शहर पर
कोई नी करियो गौर है।
बो नागीणो नागौर है।।

जठै केर सांगरी कुमठा
अर मीठा मीठा बोर है।।
बो नागीणो नागौर है।।

जठै चीं चीं करती चिड़कल्याँ
अर पीहू पीहू करता मोर है।।
बो नागीणो नागौर है।।

जठै भोली भाली जनता सारी
अर नेता हरामखोर है।।
बो नागीणो नागौर है।।

जठै पुलिस राखे मौन व्रत
अर चोर मचावै शोर है।
बो नागीणो नागौर है।।

जठै रा बळदां री चर्चा
जग में च्यारूं ओर है।
बो नागीणो नागौर है।।

जठै रा मानखां तो कांई
फेमस ढांगर ढोर है।
बो नागीणो नागौर है।।



जठै किसान मजूर मेहनती सारा
कोई नी कामचोर है।
बो नागीणो नागौर है।।

जठै अमरसिंह जेड़ा राजवी
मानीज्या जग में जोर है।
बो नागीणो नागौर है।।

कठै ही चोखो कठै ही माड़ो
ऐड़ो म्हारो ओ नागौर है।
ओ नागीणो नागौर है।।

सब रै हिरदै में बस्योड़ो
म्हारे कालजियै री कोर है।
ओ नागीणो नागौर है।।
बो नागीणो नागौर है।।
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