शनिवार, 25 मई 2013

तौलिया और रूमाल

अब जब हर तरफ मैच फिक्सिंग की ही चर्चा है, तो मैं कैसे पीछे रहता, सो लिख डाली एक छोटी सी कविता-

तौलिया और रूमाल

डाल कमर पर तौलिया,बॉलर ने फेंकी बॉल।
पहले से ही तय था, हर बॉल का मोल।।
हर बॉल का मोल,रन सोलह देने है।
मैच पूरा होते ही,साठ लाख लेने है।।

ओवर की तीन गेंदे,चली गई जब खाली।
बॉलर हुआ एन्ग्री,चेहरे पर छाई लाली।।
चेहरे पर छाई लाली,बॉलर बोला बोल।
रन बना मेरे भाई,सोलह का हुआ कौल।।

बैट्समेन ने जवाब दिया,सुन बॉलर का सवाल।
दिखता नहीं क्या तेरे को,मेरे गले का रूमाल।।
मेरे गले का रूमाल,सोलह बनाऊँ कैसे,
जब मैंने भाई से,लिए चार के पैसे।।

शनिवार, 18 मई 2013

ओ री चिड़िया

ओ री चिड़िया सुन ले
मेरे मन की बात
चुग्गा तुझे खिलाऊँगी
ले चल अपने साथ

धरती पर बैठी बैठी
हो गई मै तो तंग
नील गगन की सैर करा दे
ले चल अपने संग

इतना सा अहसान कर दे
पकड़ मेरा हाथ
चुग्गा तुझे खिलाऊँगी
ले चल अपने साथ

काश मेरे भी पंख होते,
मैं भी ऐसे उड़ पाती
तेरे संग संग पूरे जहां के
चक्कर रोज लगाती

पंख मुझे भी ला कर दे दे
सुन चिड़िया मेरी बात
चुग्गा तुझे खिलाऊँगी
ले चल अपने साथ

सोमवार, 13 मई 2013

मातृ दिवस विशेष : Hindi Poem on Mother


दोस्तों, काफी समय बाद वापिस ब्लागर पर आया हूं। इस बार हाजिर हूं माँ पर स्वरचित एक कविता के साथ
कैसी लगी बताएं जरूर

''मां''



एक अजन्मा नन्हा प्राणी 
अपनी नन्ही सी जबान से
अपने सारे दुःख चिन्ता
कहने लगा भगवान से

मैं छोटा सा नन्हा सा प्राणी
दुनिया में कैसे रह पाऊंगा
कौन संभालेगा मुझको वहां
क्या पीऊंगा क्या खाऊंगा

बोल भी ना मैं पाता ढंग से
कैसे समझूंगा वहां की भाषा
खुद से दूर क्यों कर रहे हो
बैठा था यहां अच्छा खासा

चल भी ना मैं पाता ढंग से
दुनिया में कैसे जी पाऊंगा
जो कोई खतरा आया मुझ पर
उसको कैसे झेल पाऊंगा

सारी बातें सुन प्रभु बोले
खतरों की तूं फिकर ना कर
कोई दुःख ना होगा तुझको
इस चीज का जिकर ना कर

इन सभी कामों के लिए
मुझको तूं वहां पाएगा
कभी ना होगा अकेला तूं
मेरा साया साथ जाएगा

वो साया मेरा रूप होगा
तुझको जीना वो सिखाएगा
संग संग अपने ले जाकर
रंग दुनिया के तुझे दिखाएगा

हंसना, खेलना सिखाएगा तुझको
कभी न तुझको रूलाएगा
और हां एक बात सुन
तूं उसे ''मां'' कहकर बुलायेगा।
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