मंगलवार, 24 सितंबर 2013

जय जय जय घरवाली

अभी कुछ दिनों पहले कुवारों के लिए एक गीत लिखा है। तो कुछ पत्नी पीड़ितों ने भी एक गीत लिखने की गुजारिश की। लीजिए हाजिर है हुजूर । और हाँ इसे ओम जय जगदीश हरे की धुन में गा कर देखिएगा हो सकता है जीवित आत्मा को शांति मिले।

जय जय जय घरवाली
हो देवी जय जय घरवाली
तुम्हरे सामने अभी तक
किसी की नहीं चाली।।

तुम सैण्डिल की देवी
तुम बेलन वाली
हो देवी आप बेलन वाली
तुम्हरा वार अभी तक
गया न कभी खाली।।
जय जय.........

कभी फेंकती झाडू हम पर
कभी फेंके थाली
हो देवी आप फेंकती थाली
कईयों ने इस भक्ति में
परमगति पाली।।
जय जय..............

जिस दिन तुम्हरे मन में आता
जी भर देती गाली
हो देवी जी भर देती गाली
तुम्हरी महिमा हर दम
गायें बजा ताली।।
जय जय..............

प्रेम से बोलिए घरवाली देवी की जय।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. जी मेरी घरवाली तो अभी आयी ही नहीं है ।

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  2. प्रेम से बोलिए घरवाली देवी की जय।।
    मन से बोलो तो भी ठीक है और बेमन से बोलो तो भी ठीक लेकिन बोलनी तो पड़ेगी !!
    सुन्दर !!

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  3. जिस व्यक्ति की पत्नी घर में संतुष्ट है उसे रात को अच्छी नींद आती है। जिसकी असंतुष्ट वह ऐसे मुख्यमंत्री की तरह है जिसे यह पता नहीं होता सुबह उसकी सरकार का क्या होगा घर में असंतुष्ट पत्नी सदन में नेता असंतुष्ट से ज्यादा खौफनाक होती है। कुछ भी तोड़ सकती है वह। आपका सर भी परात भी।

    बढ़िया आरती।

    आरती कीजे घरवारी जी की ,

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  4. नमन है सेंडिल की इस देवी को ... ओसका मान करना तो बहुत ही जरूरी है पता नहीं क्या कर दे ...

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    1. आभार दिगम्बर जी आप जैसे बड़े लोगों के कमेण्ट हमें बहुत उत्साहित करते है

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