सोमवार, 5 अगस्त 2013

दोस्त बड़े कमीने

बात है कालेज की,
काम की और नालेज की।
ग्रुप स्टडी के नाम से,
दोस्त के घर बैठा मैं आराम से।।

हंसी मजाक और जोक चले,
इधर उधर की कुछ बात हुई।
इसी चक्कर में दोस्तों,
अंधेरी आधी रात हुई।।

घर पहुंचते ही डैडी मिले,
डंडा लिए रेडी मिले।
डर के मारे मैं कांप रहा था,
सिचुएशन को भांप रहा था।।

डैडी बोले सुन, मेरे बिगड़े लाल,
चल बता अब तू आंखो देखा हाल।
कहां गया था बोल अब,
पोल अपनी खुद खोल अब।।

बिगड़ी बात पर ढक्कन लगा के,
चिकना चुपड़ा मक्खन लगा के।
मैं बोला सुनो डैडी जी मेरी बात,
ग्रुप स्टडी के चक्कर में हुई आधी रात।

यह सुनते ही डैडी ने,
झट से लिया फोन मेरा।
मैं भी अब समझ गया कि
बजा पूंगी का टोन मेरा।।

दस कमीनों को जो फोन किया,
तो नौ बोले अरे वो यहीं है।
थोड़ी देर में आ जाएगा,
टेंशन की बात नहीं है।।

एक ने हाँ पापा बोल के,
गड़बड़ बड़ी मोटी कर दी।
खुद पिताजी ने आकर मेरी,
पतलून दो बिलांग छोटी कर दी।।

सच कहूं मैं दोस्तों,
दोस्त बड़े कमीने।
खूब धुलाई हुई मेरी,
फिर छुड़ाया मम्मी ने।।

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