शनिवार, 18 मई 2013

ओ री चिड़िया

ओ री चिड़िया सुन ले
मेरे मन की बात
चुग्गा तुझे खिलाऊँगी
ले चल अपने साथ

धरती पर बैठी बैठी
हो गई मै तो तंग
नील गगन की सैर करा दे
ले चल अपने संग

इतना सा अहसान कर दे
पकड़ मेरा हाथ
चुग्गा तुझे खिलाऊँगी
ले चल अपने साथ

काश मेरे भी पंख होते,
मैं भी ऐसे उड़ पाती
तेरे संग संग पूरे जहां के
चक्कर रोज लगाती

पंख मुझे भी ला कर दे दे
सुन चिड़िया मेरी बात
चुग्गा तुझे खिलाऊँगी
ले चल अपने साथ

20 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन संभालिए महा ज्ञान - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. नन्हीं चिड़िया ज़रूर ले जायेगी अपने साथ.....
    :-)

    अनु

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  3. वाह! बहुत सुन्दर !

    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest postअनुभूति : विविधा
    latest post वटवृक्ष

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  4. bahut khoob...
    काश मेरे भी पंख होते,
    मैं भी ऐसे उड़ पाती
    तेरे संग संग पूरे जहां के
    चक्कर रोज लगाती

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर गीत .....इसका पोडकास्ट बनाना चाहूंगी .....आपकी अनुमति से .....

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  6. अवश्य अर्चना जी! नेकी और पूछ पूछ। शुभ काम में देरी कैसी! और हां हमें सूचित अवश्य करना

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  7. बालसुलभ कोमल भाव, सरल सहज शब्द चयन .सुन्दर रचना, वाह !!!

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  8. भोली भाली शैली में प्रस्तुत सुन्दर व रोचक रचना !

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