सोमवार, 13 मई 2013

मातृ दिवस विशेष : Hindi Poem on Mother


दोस्तों, काफी समय बाद वापिस ब्लागर पर आया हूं। इस बार हाजिर हूं माँ पर स्वरचित एक कविता के साथ
कैसी लगी बताएं जरूर

''मां''



एक अजन्मा नन्हा प्राणी 
अपनी नन्ही सी जबान से
अपने सारे दुःख चिन्ता
कहने लगा भगवान से

मैं छोटा सा नन्हा सा प्राणी
दुनिया में कैसे रह पाऊंगा
कौन संभालेगा मुझको वहां
क्या पीऊंगा क्या खाऊंगा

बोल भी ना मैं पाता ढंग से
कैसे समझूंगा वहां की भाषा
खुद से दूर क्यों कर रहे हो
बैठा था यहां अच्छा खासा

चल भी ना मैं पाता ढंग से
दुनिया में कैसे जी पाऊंगा
जो कोई खतरा आया मुझ पर
उसको कैसे झेल पाऊंगा

सारी बातें सुन प्रभु बोले
खतरों की तूं फिकर ना कर
कोई दुःख ना होगा तुझको
इस चीज का जिकर ना कर

इन सभी कामों के लिए
मुझको तूं वहां पाएगा
कभी ना होगा अकेला तूं
मेरा साया साथ जाएगा

वो साया मेरा रूप होगा
तुझको जीना वो सिखाएगा
संग संग अपने ले जाकर
रंग दुनिया के तुझे दिखाएगा

हंसना, खेलना सिखाएगा तुझको
कभी न तुझको रूलाएगा
और हां एक बात सुन
तूं उसे ''मां'' कहकर बुलायेगा।

3 टिप्‍पणियां:

  1. माँ के लिए बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.

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  2. बहुत सुन्दर कविता हे माँ तो माँ ही हे उसके आगे सब बेकार हे ! कभी टाइम मिले तो हमारे ब्लॉग पर भी पधारे मेरा ब्लॉग भी आपकी तरह तकनिकी को समर्पित हे ! आपका ब्लॉग मुझे अच्छा लगा इसलिए में इस से जुड़ गया अगर अओको भी मेरा ब्लॉग पसंद आये तो इस पर अपने विचार दे और इस से जुड़े !

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