मंगलवार, 10 मई 2011

मस्ती की पाठशाला

 

बोर्ड की परीक्षा में

हाई स्कूल की कक्षा में

एक भाई साहब

मेज पर चाकू गाड़े

परीक्षा देने में तल्लीन थे ।

निरीक्षक ने देखा

पहले खिसिआया

फिर झल्लाया

अंत में छात्र के समक्ष

करबद्ध हो कर

धीरे से बड़बड़ाया ।

हे आर्य ! हे करूश्रेष्ठ

आप कॉपी रूपी रणक्षेत्र में

युद्ध खंजर से क्यूं लड़ रहे हैं घ्

कॉपी पर जूझ रहा छात्र

गुरू को कुपित नेत्रों से घूर कर

ज़ोर से चिघांड़ा ।

हे विद्यापति ! हे गुरूवर !

भगवान ने आपको

दो आंखें मुफ्त में दीए

ऊपर से आपने

लालटेन भी लगा ली ।

पर आप ये न समझ पाये

कि मैंने चाकू

प्रश्नपत्र पर क्यूं गाड़ा है ।

हे विद्यानिधि !

आपके पंखे में रेग्युलेटर नहीं है ।

ये तीन पंखों की चिरईया

फुल स्पीड पर फड़फड़ा रही है ।

मेरा प्रश्न पत्र

इसकी तीव्र वायु से

उड़ा जा रहा था ।

अतः

मैंने इसकी लाश पर

चाकू गाड़ कर

इसको उड़ने से वंचित कर दिया है ।

और कोई बात नहीं

ये तो मात्र पेपरवेट है ।

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