शनिवार, 14 मई 2011

घन्टी का मिस्त्री

सर्वेश दुबे की हास्य कविता।
मालिक ने बिजली मिस्त्री को अपने पास बुलाया,पूछा, 
शर्मा मेम साब के घर की घन्टी ठीक कर आया?

इस कम्पलेन का नाम सुनते वह गुस्से मे बोला
कैसे ठीक करता? जब मेम साब ने दरवाजा ही नही खोला
फिर मिस्त्री ने अपनी आप बीती सुनायी
वो तो मेरा दिल ही जानता है श्रीमान जी कि
बिना खाये पिये मैने कितनी देर घन्टी बजायी 

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